मंगलवार, 3 फ़रवरी 2009

मै

मै उसे बहुत प्यार करता हूँ
मगर कह नहीं सकता,
क्योकि
मै जब यह कहता हूँ की
मै इमानदार नहीं हूँ, तब भी
मै इमानदार नहीं होता।

9 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

सुन्दर भावना!

आप सादर आमंत्रित हैं, आनन्द बक्षी की गीत जीवनी का दूसरा भाग पढ़ें और अपनी राय दें!
दूसरा भाग | पहला भाग

Harkirat Haqeer ने कहा…

Amitabh ji aapki kuch rachnayen padhi accha likhte hain aap....BDHAI.......!

sudhir ने कहा…

Bahut khub .....
"Gagar me sagar"

sudhir ने कहा…

Bahut khub .....
"Gagar me sagar"

sudhir ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Science Bloggers Association of India ने कहा…

आपने अपने मन के भावों को बहुत ही ईमानदारी से बयां कर दिया है।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुंदर सच कहा आपने ..यह चाँद पंक्तियाँ बहुत ही गहरे अर्थ दे गई ...

sudhir ने कहा…

आदमी का इमानदार होना गर्भ धारण करने जेसा है जिसमे कोई संशय की गुंजाईश नही रहती ! आदमी या तो इमानदार होता है या नही होता है !

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

सच तो यही है जो ईमानदार होता है उसे ये कहने की जरुरत ही नही पड्ती। सच आप बहुत ही गहराई में जाकर लिखते है। वैसे हमें बता दीजिए हम सदेंशा ले जाऐगे वैसे भी इसके लिए हम मशहूर थे किसी जमाने में। ना जाने कहाँ चला गया वो जमाने रह रह कर बस ....