बुधवार, 4 फ़रवरी 2009

अमृत

जिसके शीश
हाथ पिता का
और
माता की
आँचल छाया,
उसके जीवन
सागर- मंथन में
भाग सदेव
अमृत ही आया।

3 टिप्‍पणियां:

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

अमिताभ जी,

सच कहा है. हम सबका जीवन अमृत वर्षा से सदा खुशहाल रहे.

मुकेश कुमार तिवारी

seema gupta ने कहा…

उसके जीवन
सागर- मंथन में
भाग सदेव
अमृत ही आया।
"जिन्दगी का एक खुबसुरत सच"

Regards

sudhir ने कहा…

मुक़द्दस जज्बातों को सलाम ! में भी रोज अमृत पा जाता हूँ , जब कदमो में माता -पिता के शीश नवाता हूँ !