सोमवार, 2 फ़रवरी 2009

१ बंधुआ, २ शून्य

१,
जो दर्द सहे है
जिन दर्दो को सहना है
हिसाब नहीं होता आदमी के पास।
सिवाय इसके की
ब्याज चड़ता जाता है
ओर आदमी समझ नहीं पाता
की
वो दर्दो का बंधुआ
कैसे बन गया?

२,
आदमी अधुरा है।
जन्म से लेकर मृत्यु तक,
कितनी बार जिया ओर कितनी बार मरा?
इसका कोई गणित नहीं।
हां गणित होता है,
धन का, समाज का, लोक का,
लाज का, कर्तव्यो का,
उसका- मेरा ....
मगर जीवन का नहीं,
यानी
टोटल में शून्य है।


13 टिप्‍पणियां:

the pink orchid ने कहा…

aapki kavita aaki buddhimata ki parichayak hai...

meri hindi kavitao ki chhoti si koshish yaha se shuru hoti hai,
kripya aakar mera hausla barhayie

http://merastitva.blogspot.com

the pink orchid ने कहा…

amitabh ji ho sapke to aap mere ye blog follow kareing taaki aapki vishesh tippniya mujhe milti rahein...main sikhna chahti hu likhne ke sath sath...

mayur ने कहा…

सच मुच कितना सुंदर लगता है जब कोई हिन्दी मैं लिखता है ,यूँ ही लिखते रहिए, स्वागतम एक बार और . rangehayat.blogspot.com आपको समझने मैं मज़ा आ रहा है

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आप की कविता ने बहूत अलग अंदाज में जिंदगी की सचाई को परोसा है
बहूत खूब लगा लेखन

islamicwebdunia ने कहा…

अमिताभ भाई आपको हमारी शुभकामनाएं

E-Guru Rajeev ने कहा…

हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

शुभकामनाएं !


"टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

ई-गुरु राजीव ने कहा…

आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

परमजीत बाली ने कहा…

दोनो ही रचनाए बहुत बढिया हैं।इसी तरह लिखते रहें। शुभकामनाएं।

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Abhishek ने कहा…

Rachna mein bhi spashtata haiaapki. Swagat.

shyamgkp श्याम ने कहा…

कविताएं अच्छी हैं। एक दिन आएगा जब लोग आपको जरूर समझेंगे। निराश होने की जरूरत नही है। यह टिप्पणी मैं आपका प्रोफाइल पढ़ने के पश्चात कर रहा हूं।
मेरी शुभकामनाएं।
श्याम बाबू शर्मा
http://shyamgkp.blog.co.in
http://shyamgkp.blogspot.com
http://shyamgkp.rediffiland.com

E mail- shyam_gkp@rediffmail.com

प्रवीण जाखड़ ने कहा…

बहुत सुंदर चिट्ठा। ...और सुंदर लेखन। चिट्ठों के इस सागर में गोते लगाने के लिए आपका स्वागत है। आप अच्छा लिखें और आपके शब्द ऐसे ही हमारे दिल को छूते रहें। हमारी शुभकामनाएं हमेशा आपके साथ हैं।

नारदमुनि ने कहा…

jo mata-pita ko sath rakhta hai uska koi javab ho hee nahi sakta. narayan narayan