बुधवार, 14 अक्तूबर 2009

रात हवा ने बहुत बात की

रात हवा ने बहुत बात की
रग-रग, छू-छू मुलाकात की।

ऐसे कोई बौराता है
जीना मुश्किल हो आता है,
ठन्डा,भीना मादक अंचल
परस-परस मन बहकाता है।

ऐसी बैरिन कौन जात की
रात हवा ने बहुत बात की।

खिलतीं कलियां शर्माती हैं
झूम,लचक झुक झुक जाती हैं,
बे-मौसम, बे-वक़्त, करकशा
हवा अगन सुलगा जाती है।

लज्जा उघरे गात गात की
रात हवा ने बहुत बात की।

अर्पित मान हुआ जाता है
मंत्र-मुग्ध मन झुक आता है,
नस-नस में बस पवन हठीला
सन-सन सी सरसा जाता है।

बात करे अब कौन प्रात की
रात हवा ने बहुत बात की।

15 टिप्‍पणियां:

अजित वडनेरकर ने कहा…

बढ़िया।
बैरिन की जात जानकर क्या करेंगे?
क्या इस शृंगार-चर्चा और ऋतु-स्मरण में भी जाति-विमर्श
के आकांक्षी हैं

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर:

बात करे अब कौन प्रात की
रात हवा ने बहुत बात की।

बढ़िया.

'अदा' ने कहा…

बात करे अब कौन प्रात की
रात हवा ने बहुत बात की।
Sundar..!!
accha laga padhna ..!!

raj ने कहा…

ऐसे कोई बौराता है
जीना मुश्किल हो आता है,
ठन्डा,भीना मादक अंचल
परस-परस मन बहकाता है।...raat baat karti rahe to koun subh ko chahega.....

अनिल कान्त : ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना

Science Bloggers Association ने कहा…

बहुत ही गजब की शब्द योजना है अमिताभ भाई। रात हवा ने बहुत बात की। रग रग छू छू मुलाकात की। इतनी छोटी बहर में कमाल कर दिया है आपने। बहुत बहुत बधाई।
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रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

रात हवा ने बहुत बात की यह ख्याल ही बहुत खूबसूरत लगा सुन्दर रचना

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

अमिताभ जी असली सुख का आनंद ले रहे है आप। लोग कहते है ये सुख .... है वो सुख.... है। पर कोई उनसे बोले कि असल में ये सुख है। पता नही किस सुख की तलाश में पूरी जिदंगी यूँ ही बीता देते है और जो सुख है उससे दूर भागते रहते है। खैर कुछ ज्यादा ही फैंकने लगा। कुंभ राशि का जो ठहरा। वैसे काश यह हवा इधर भी आ जाती है। सच पूछिए तो इस हवा का कुछ अहसास मुझे भी हो गया आपकी इस रचना को पढकर। ये आपके शब्दों का कमाल है जी।

रात हवा ने बहुत बात की
रग-रग, छू-छू मुलाकात की।

लगता है दीवानी थी ........:)

ऐसे कोई बौराता है
जीना मुश्किल हो आता है,
ठन्डा,भीना मादक अंचल
परस-परस मन बहकाता है।

........................... अद्भुत।

शोभना चौरे ने कहा…

खिलतीं कलियां शर्माती हैं
झूम,लचक झुक झुक जाती हैं,
बे-मौसम, बे-वक़्त, करकशा
हवा अगन सुलगा जाती है।
ati sundar .hava ka ye roop bhi bha gya .rat ki kuch dastan aisi bhi hai

रात ,अश्को से भीगी आँखों को
सुबह की नमी ने सुखा दिया

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

kshringaar ras main bhi mahir ho aap?
Lagta hai fursat mil gayi aapko 'chunaaovon se'

haha !!

ye jo iske antre aus uski geyuta hai usne sabse zayada prabhavit kiya !!
"लज्जा उघरे गात गात की
रात हवा ने बहुत बात की।"

"बात करे अब कौन प्रात की
रात हवा ने बहुत बात की।"

atyant prabhavshali rachna....

"ऐसे कोई बौराता है
जीना मुश्किल हो आता है,"

aajkal baurne wale bhi kism kism ke ho gaye hain....
.to ashchrya na karein ki kaun kis tarah buraiye !!
wo Doordarshan main ek dharavahik aat tha nah....
..Kisi ko mohabbat ka hai zunnon !!

GATHAREE ने कहा…

hawa se baat kar liye
bade lucky ho

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अर्पित मान हुआ जाता है
मंत्र-मुग्ध मन झुक आता है,
नस-नस में बस पवन हठीला
सन-सन सी सरसा जाता है ......

BAHOOT HI SUNDAR HAI AAPKI RACHNA ... SHABDON KE SAATH THIRAKTE HUVE KHOOBSOORAT SHABD .... SHRANGAAR ...

Pandit Kishore Ji ने कहा…

"baat kare ab kaun praat ki
raat hawa ne bahut baat ki"
.............ati sundar rachna

ओम आर्य ने कहा…

जब रात की रानी को चंचल हवाओ का साथ मिल जाये ......बौराना लाज़्मी है .....तब ख्वाब टुटॆ यह कौन चाहेगा ......सुर और ताल से भरपूर है आपकी रचना!

गौतम राजरिशी ने कहा…

आह ! इस लय-प्रवाह-छंद और कोमल पंक्तियों पर ति झूम उठा मन अमिताभ जी....

लाजवाब!