बुधवार, 4 मार्च 2009

मै सुख चुरा लाया हूँ

जिन्हें प्रतीक्षा रहती है मेरे शब्दों की, उन्हें समर्पित -

" बडी मुश्किल से
दुःख को सुला आया हूँ,
तुम्हारे लिए
कुछ सुख चुरा लाया हूँ।

ग़मगीन रात में
चांदनी बिखेरता ये चाँद क्यो हंस रहा है?
लो प्रिये , उसकी मुस्कुराहट उधार लाया हूँ।

तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ।

यकीन करो मै
उम्रभर काँटों के बीच जूझता रहा,
आज एक गुलाब खिला लाया हूँ।

तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ।

मुझे पता नही
प्रेम का इजहार कैसे होता है?
जो दिल में था वो उगल आया हूँ।

तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ।

है हाथ तुम्हारे
पतवार मेरी मासूम जिन्दगी की ,
मै नाव बीच मझधार छोड़ आया हूँ।

तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ
बड़ी मुश्किल से दुःख को सुला आया हूँ। "

27 टिप्‍पणियां:

Harkirat Haqeer ने कहा…

बडी मुश्किल से
दुःख को सुला आया हूँ,
तुम्हारे लिए
कुछ सुख चुरा लाया हूँ.... Waah...! Amitabh ji bhot sunder bhav liye hue hai ye kavita..bhot bhot BDHAI....!!

the pink orchid ने कहा…

khushnuma hava ke jhonke ki tarah lagi ye kavita.. bahut sundar amitabh ji.. samarpan sveekar karti hoon, kyunki mujhe to intezaar rehta hi hai aapki kavitao ka..

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

bahut hi sundar bhaav puran kavita......shubh kaamnaye

kumar Dheeraj ने कहा…

यकीन करो मै
उम्रभर काँटों के बीच जूझता रहा,
आज एक गुलाब खिला लाया हूँ।
तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ।
वाह अमिताभ भाई क्या कमाल का लिखा है आपने । इस रचना की हर लाइन बेमिसाल है । अपने शब्दो के जादु से आपने इसे खूबसूरत बना दिया है । आपका आभार

दिगम्बर नासवा ने कहा…

चांदनी बिखेरता ये चाँद क्यो हंस रहा है?
लो प्रिये , उसकी मुस्कुराहट उधार लाया हूँ
तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ
बड़ी मुश्किल से दुःख को सुला आया हूँ। "

अमिताभ जी...........
बेहतरीन लिखी है आपने ये रचना, कमाल के शब्द हैं, सुंदर भावों से संजोया है इसे

the pink orchid ने कहा…

Amitabh ji, bahut khushi hui aapki shubhkaamnaayein paa kar.. dhanyawaad.. aur aapko bhi holi ki dher saari khushiyaan mile..

maa-pitaji ke charan sparsh kijiyega meri taraf se bhi.. aasha hai aap jab lautenge to mere liye potli bhur kar unka aashirwaad lete aayenge..

haan holi ke din thoda gulaal rakh dijiyega unke charno mein aur dhanyawaad dijiyega, aapse jo raushni bikhar rahi hai unmein maa-pitaji ki garima jhalakti hai..

aasha hai main koi chhoti muh badi baat nahi kar gayi..

the pink orchid ने कहा…

bahut bahut shukriya amitabh ji.. aapki aatmiyata aapse mile har ek shabd mein jhalakti hai..aasha hai aapki yaatra manglamayi hogi .. aakar bataiyega holi kaisi rahi..

the pink orchid ने कहा…

jab shabdon mein sneha bhara ho to kitna bhi likha jaye kum hi lagta hai amitabh ji.. mun to sneha ka laalchi hota hai..aapse bahut saara sneha mil raha hai aur main aapki aabhaari hoon.. bane rahiyega.. ishwar aapko bahut saare khushiyon ke pal de aur us hur pal mein dher saari zindagi de..

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ
बड़ी मुश्किल से दुःख को सुला आया हूँ।

क्या कहूँ, नि:शब्द सा हो गया हूँ पढकर।

shyam kori 'uday' ने कहा…

... bahut khoobsurat rachanaa hai!!!

sandhyagupta ने कहा…

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ .

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर ने कहा…

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

bahut hi sundar aur shashakt nazm sir ji

तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ।
है हाथ तुम्हारे
पतवार मेरी मासूम जिन्दगी की ,
मै नाव बीच मझधार छोड़ आया हूँ।


ye pankhtiyan ultimate hai

wah ji wah

bahut badhai ho aapko
maine bhi kuch likha hai ,dekhiyenga jarur.

aapka

vijay

bhootnath( भूतनाथ) ने कहा…

haan aapkaa sukh mujhe mil gaya....paakar dil baag-baag ho gayaa......aapko bada hi dhanyavaad.........main pataa nahin kahaan-kahaan iske liye bhataktaa phir rahaa tha....!!

अनिल कान्त : ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना है

समीर सृज़न ने कहा…

"बड़ी मुश्किल से
दुःख को सुला आया हूँ,
तुम्हारे लिए
कुछ सुख चुरा लाया हूँ..."
अमिताभ जी इस चोरी के लिए आपको बधाई..इस दम तोड़ती दुनिया में कोई तो है जिसके लिए चोरी अपराध नहीं..और ऐसी चोरी करने के लिए हम आप जैसे लोग हमेशा तरसते है..

BrijmohanShrivastava ने कहा…

श्रीवास्तव जी /सुख चुरा कर नहीं और चाँद की मुस्कराहट उधार नहीं छीन कर लाना चाहिए था /पतवार छोड़ कर नहीं साथ लेके आया हूँ और साथ ही तुम्हे भी ले जाने आया हूँ -(प्रथ्वीराज रासो में कुछ ऐसा की लिखा है )

गौतम राजरिशी ने कहा…

क्या बात है अमिताभ भाई....क्या बात है
बहुत अच्छे...बहुत-बहुत अच्छे
लिखते रहेंयूं ही....

kumar Dheeraj ने कहा…

अमिताभ जी आपने अगला पोस्ट नही लिखा है इसलिए कमें नही डाल रहा हूं । मैने पाकिस्तान के हालात के ऊपर ये पोस्ट लिखा है जूरूर पढ़िए और अपनी भावनाओं को व्यक्त करें । शुक्रिया

kumar Dheeraj ने कहा…

सीमा जी आपने बेहतरीन कविताई सोच लिखी है । पढ़कर काफी अच्छा लगा । खासकर ये पंक्तिया मुझे काफी बेहतर लगा ।
बिखेरता रहा वादों के पुष्प वो

मै आँचल यकीन का बिछाये

उन्हें समेटती रही....शुक्रिया

hempandey ने कहा…

-सुंदर.

रंजना ने कहा…

वाह ! वाह ! वाह ! कोमल भावों से ओतप्रोत सुन्दर मनमोहक और हृदयस्पर्शी रचना ने मुग्ध कर लिया........बहुत बहुत आभार आपका..

sudhir ने कहा…

बहुत ही सुन्दर !
काफी दिनों के बाद
सकुनियत भरी खुराक !
साधुवाद

विनीता यशस्वी ने कहा…

है हाथ तुम्हारे
पतवार मेरी मासूम जिन्दगी की ,
मै नाव बीच मझधार छोड़ आया हूँ।

bahut achhi kavita...

the pink orchid ने कहा…

amitabh ji.. bahut samay ho gaya aap ke darshan nahi huye.. aasha hai sab theek hai..

Priyanka Singh ने कहा…

तुम्हारे लिए कुछ सुख चुरा लाया हूँ
बड़ी मुश्किल से दुःख को सुला आया हूँ।

wah wah ... too good

शोभना चौरे ने कहा…

amitabhji
aaj kuch dhundh rhi ki acha kuch pdhne ko mile par kuch mila nhi aur fir aapke blog ko jra peeche le gai to bhut hi sundar kavita pdhne ko mil gai .
bhut achi aur sachhi si lgi kavita .